चाँद-तारे अग्नि को साक्षी मान अचल अहिवात का ले वरदान। चाँद-तारे अग्नि को साक्षी मान अचल अहिवात का ले वरदान।
भूख प्यास से व्याकुल हो 'कुएँ में मौत' के लटक रहा।। भूख प्यास से व्याकुल हो 'कुएँ में मौत' के लटक रहा।।
ना कर ये गुनाह जिंदगी के लिये अश्क भी अपने न रहे ना कर ये गुनाह जिंदगी के लिये अश्क भी अपने न रहे
न मंजिल का पता न कोई ठिकाना बस राह पकड़ चलता ही चला। न मंजिल का पता न कोई ठिकाना बस राह पकड़ चलता ही चला।
दस्तक देता है समय, अवसरों के साथ उनसे अनजान अपनी पहचान बनाता हूँ। दस्तक देता है समय, अवसरों के साथ उनसे अनजान अपनी पहचान बनाता हूँ।
मैं यूँ ही नहीं मिलता मैं में उतरना होता है उतरोगे नहीं तो युग भी भ्रमित वेद-ऋचाएँ भ... मैं यूँ ही नहीं मिलता मैं में उतरना होता है उतरोगे नहीं तो युग भी भ्...